ये देश इनका भी उतना है
जितना तेरा है और मेरा है,
फिर अपने ही घर जाने की आस में
क्यूँ ये घबराया सा गरीब मजदूर श्रमिकों का रेला है?
शर्म आती है अपने ऊपर
'विकसित' समाज और सरकारों पर,
ये तेरा राज्य ये मेरा राज्य के नाम पर
क्यूँ पशुओं की तरह हमने इन्हें इधर उधर ठेला है?
क्यूँ आखिर क्यूँ?
ये देख इनका भी उतना है जितना तेरा और मेरा है।।
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