Wednesday, 15 January 2020

थोड़े बादल, थोड़ी शराब आए।।


परेशानियों से कह दो कुछ ठहर के आए,

पहले थोड़े बादल, थोड़ी शराब आए।।

छिप जाने दो आफ़ताब को हिम के आंचल में,

पर कह देना कि कल फिर दुरुस्त आए।।

बिखर जाने दो रंगीन पानी को, 

इससे पहले कि महताब आए।।

मंजिल ए मुकां का तो पता नहीं,

रास्ते बड़े बरखुरदार आए।। 

ज़हर को पहुंचने दो दिलों दिमाग तक, 

फिर क्या आंधी, क्या तूफान आए।।

लड़ना तो  था जमाने से अकेले ही, 

खुदा बनकर तेरे वर्गे यार आए।।

ढूंढ रहा था पता हसीं का अपनी,

चलते ही तोहफे गमों के हज़ार आए।।