आदतों को बदलने का,
थोड़ा सोचने, थोड़ा समझने का,
आत्मचिंतन का मौका दिया है,
प्रकृति ने पृथ्वी को एक मौका दिया है।
टूटे रिश्तों को जोड़ने का,
पश्चिमी आचरण को छोड़ने का,
स्वदेश को, स्वदेशी को अपनाने का,
स्वयं को, देश को आत्मनिर्भर बनाने का मौका दिया है,
प्रकृति ने पृथ्वी को एक मौका दिया है।
दूर भागती जिंदगी को ठहरने का,
कुछ फुरसत के पल बिताने का,
कॉफी से चाय पर आने का,
हाथ जोड़, नमस्ते दोहराने का,
प्रकृति ने फिर इंसा को एक मौका दिया है।
तुलसी का मूल्य समझने का,
वेदों को, योग को अपनाने का,
स्वर्णिम भारतीय इतिहास को पुनर्जीवित करने का,
फिर से खुद को पहचानकर, घर को लौटने का मौका दिया है,
प्रकृति ने संभलने का एक मौका दिया है।
इंसानों को घरों में कैद कर,
जंगल में जानवरों को रिहा किया है,
नदियों को, नहरों को फिर से जीने का,
परमाणु के युग में कीटाणु कि अहमियत समझने का अवसर दिया है
प्रकृति ने पृथ्वी को एक मौका दिया है।।
शुभम गुप्ता
सहायक कमांडेंट
31 वाहिनी,
(केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल)
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