Monday, 24 September 2018

Being Content

Recently I had a huge revelation. It happened while I was on a holiday in Kerela
After the floods and deluge there, we were scared of so many things before reaching there..
I was sitting by a river bank with a few of my friends - barefoot and carefree watching those fisherman's  working hard to reinstate what they  have lost..

Cold thrilling breeze at my back, my feet dipped in water and soothing sound of a flowing river in my ears, I realized just how happy I was in that moment.

No, not just happy. I was content.

That made me think back to all the other times in life I had been content. The more recollections I skimmed through the more I realized they all had one thing in common - money was the farthest thing from my mind in those moments.

What I'm trying to say is simply this - we have been conditioned to believe that we need a million things to be content, but when it comes down to the things that really matter, all you need is good company. Everything else is easily taken care of.

So if you must invest, invest in people. There is nothing as enriching as a genuine human connection. Nothing like looking into the eyes of another to find the echoes of the laughter in your heart. Let the money be for other things.

All you need to be truly content is the right people to share your joy with.
Choose those people wisely and there will be no one as rich as you in the whole world.

Till next time,
Shubham

Saturday, 22 September 2018

Girl in a Black Dress

There is a girl in a little black dress.,
Her  thoughts are in a mess...

Life is covered in scars..
But she is dreaming of Mars...

She held something  in her pale arms...
Breathing cold nothing to warm..

Standing right by the window, that's where she always sat,
Luck is getting thinner and troubles fat..

The girl in the window that was her name..
A legend, a myth..
she was drowning in fame..

But the year started to past,
and time passed on so fast..
Her little black dress turn to a dark brown...
She is ready to surrender her beauty crown...

As her Fame left her,
Happiness can't be a glue,
Clouds covered the sky  Everything turned  blue...

She found out soon,
Sitting riverside in an afternoon..
She never had fame,
She was just a silly toy,
In their silly game...

They build her up..
Then knock her right back down..
They always held a smile...
But she will forever hold a frown...
They taunted her always... Driving her insane..
She realised that she can't live without the pain....

She is in my Mind

A strange journey :

We decided to walk together, to a place forbidden, called heaven.
We had her talks and my love all time, it kept us alive and so driven.
She used to lose her path, I used to hold her hand,
But she wanted to fly up high, and lose her touch to sand.

We used to camp, when she felt exhausted,
She whispered in my ears, "I wish this moment.. Mm.. everlasted".
She had her share of love, and I had my share of smile.
With the sun set and the darkness out, she disappeared slowly during every mile.

When the night went dark, I felt something was wrong.
It scared the hell outta me, and my gut was even more strong.
I looked everywhere, and had no one around.
My mind lost its ground, as there was no one I found.

No camps, no love and no holding hands, she was there, but  just in my mind.
It was my mind only, who whispered a line, "love is a drug, and it's one of a kind."
And as the darkness faded, the light spread out.
I felt just breeze and heard only the birds loud.

The journey was always alone, but my mind needed the one.
And when I woke up to the sun, I was happy for the nightmare being done.

Shubham Gupta

Tuesday, 11 September 2018

Its time to Go..

Sip your whiskey,
nice and slow,
No one ever knows
when it’s time to go,
There’ll be no time
to enjoy the glow,
So sip your whiskey
nice and slow.

Life is too short but
feels pretty long,
There’s too much to do and so much going wrong,
Most of the time you struggle to be strong,
Before it’s too late
and it’s time to go,
Sip your whiskey
nice and slow.

Some friends stay,
others go away,
Loved ones are cherished,
but not all will stay,
Kids will grow up
and fly away,
There’s really no saying how things will go,
So sip your whiskey
nice and slow.

Just sip your whiskey
nice and slow.....

Friday, 7 September 2018

की एंड का का नशा ए मोहब्बत

Ki: शराब की क्या औक़ात गिराए मुझे
हम खुद नशा सिर पर चढ़ाए रहते हैं..

Ka:हम ढूंढ रहे थे दारू में नशे को,
हमे क्या पता था कि जिन्दगी ही नशीली हो जाएगी।

Ki:
तुम दारू मे नशा
और नशे मे दवा ढूंढ़ते हो
दवा सुकून की
पर यकीन मानो सुकून इतना सस्ता नही
की युहीं मिल जाये।

Ka: दिल ए दौलत तो बेशुमार दी है खुदा ने,
सुकून क्या, जन्नत खरीद लेते,
वो तो बस बेखुदी की चादर जो ओढ़ रखी ह हमने।।

Ki :बेखुदी की चादर ज्यादा लंबी लगती है
सुकून और जन्नत खरीदने की बात कर रहे हो..

Ka:बातों में क्या रखा है, चाँद तारे भी टूट जाते हैं बातों में,
पर हान ऐतबार करना ए मेरे दोस्त,
चादर लंबी हो या छोटी,
लेकिन साफ है।।

Ki:  मुसाफिरों की तरह बात कर रहे हो।

Ka: अब आदत हक चली है मुसाफ़िरी की,
खुद को समजने की समझाने की,
कुछ दाग़ लगे थे उसपर किसी वक़्त ए जमाने मे,
जमाना गुजर गया है साफ करते करते।।

Ki:
निरमा ओर घड़ी छोड़ो
इस बार चादर टाइड से साफ करो!!

Ka: का अभी भी टाइड से वो दाग साफ करने में लगा हैं।।

की एंड का का नशा ए मोहब्बत

Ki: शराब की क्या औक़ात गिराए मुझे
हम खुद नशा सिर पर चढ़ाए रहते हैं..

Ka:हम ढूंढ रहे थे दारू में नशे को,
हमे क्या पता था कि जिन्दगी ही नशीली हो जाएगी।

Ki:
तुम दारू मे नशा
और नशे मे दवा ढूंढ़ते हो
दवा सुकून की
पर यकीन मानो सुकून इतना सस्ता नही
की युहीं मिल जाये।

Ka: दिल ए दौलत तो बेशुमार दी है खुदा ने,
सुकून क्या, जन्नत खरीद लेते,
वो तो बस बेखुदी की चादर जो ओढ़ रखी ह हमने।।

Ki :बेखुदी की चादर ज्यादा लंबी लगती है
सुकून और जन्नत खरीदने की बात कर रहे हो..

Ka:बातों में क्या रखा है, चाँद तारे भी टूट जाते हैं बातों में,
पर हान ऐतबार करना ए मेरे दोस्त,
चादर लंबी हो या छोटी,
लेकिन साफ है।।

Ki:  मुसाफिरों की तरह बात कर रहे हो।

Ka: अब आदत हक चली है मुसाफ़िरी की,
खुद को समजने की समझाने की,
कुछ दाग़ लगे थे उसपर किसी वक़्त ए जमाने मे,
जमाना गुजर गया है साफ करते करते।।

Ki:
निरमा ओर घड़ी छोड़ो
इस बार चादर टाइड से साफ करो!!

Ka: का अभी भी टाइड से वो दाग साफ करने में लगा हैं।।

Sunday, 2 September 2018

क्रांति

फिक्र उनको है बहुत आवाम की ,
मुल्क की , सरकार की , हुक्काम की,
बस्ती बस्ती घूमते हैं लाल झंडे ले के वो ,
वो नही परवाह करते हैं किसी अंजाम की ।
एक ही नारा है उनका , एक ही एलान है ,
बस वही काबिल हैं बाकी हर कोई बेईमान है ,
इतने काबिल हैं कि सारे मुल्क के मसलों का हल ,
वो बताते बैठ कर दूकान पर हज़्ज़ाम की ।
वो बताते हैं कि कैसे क्रांति आए देश में ,
माओ पर चर्चा करो , क्या है रखा स्पेस में ,
तोड़ दो सड़कें , उड़ा दो पुल कि तोड़ो हस्पताल ,
पाठशाला , बैंक ये चीज़ें हैं सब बेकाम की ।
क्या करोगे रोटियों का , क्या करोगे भात का ,
कुछ नही है मोल , घर परिवार और जज्बात का ,
क्रांति की खातिर वो कहते हैं कि सब कुछ छोड़ दो ,
जो भी सरकारी दिखे , हर चीज तुम वो तोड़ दो ,
सड़क , बिजली , काम धंधा इनकी चिंता मत करो ,
क्रांति की खातिर हैं ये कुर्बानियां बस नाम की ।
क्रांति लाओ क्रांति लाओ , खून से रंग दो ज़मीन ,
बच्चे बच्चे को बना दो मौत देने की मशीन ,
जंग लड़ने के लिए कुछ गांव वाले भेज दो ,
कॉमरेडों को जरूरत है जरा आराम की ।
लोग पागल हैं कि इतना भी समझ पाते नही ,
जंगलों में जंग लड़ने कॉमरेड आते नही ,
काम उनका है शहर में बैठ कर बस सोचना ,
न रखें उम्मीद उनसे और किसी भी काम की ।
खून की नदियां बहा दीं , सोच की तलवार से ,
क्यों न फिर मांगे वो सत्ता देश की अधिकार से ,
लाखों मजलूमों की लाशों पे बने इज़लास पर ,
गर न बैठा वो करोडों ख्वाहिशों की लाश पर ,
दूसरों की जंग लड़ते मर गया गर कॉमरेड ,
सुख न सत्ता का मिला , फिर क्रांति ये किस काम की ?

Lal Salam

कामरेड कथा..लव,सेक्स और क्रान्ति

🔴अभी पुष्पा को जेएनयू आये चार ही दिन हुए थे कि उसकी मुलाक़ात एक क्रांतिकारी से हो गयी.लम्बी कद का एक सांवला सा लौंडा.ब्रांडेड जीन्स पर फटा हुआ कुरता पहने क्रान्ति की बोझ में इतना दबा था कि उसे दूर से देखने पर ही यकीन हो जाता था कि इसे नहाये मात्र सात दिन हुये हैं.बराबर उसके शरीर से क्रांति की गन्ध आती रहती थी.लाल गमछे के साथ झोला लटकाये सिगरेट फूंक कर क्रांति कर ही रहा था तब तक.पुष्पा ने कहा……”नमस्ते भैया.

“हुंह ये संघी हिप्पोक्रेसी.काहें का भइया और काहें का नमस्ते ? हम इसी के खिलाफ तो लड़ रहे हैं.प्रगतिशीलता की लड़ाई.ये घीसे पीटे संस्कार,ये मानसिक गुलामी के सिवाय कुछ नहीं.आज से सिर्फ लाल सलाम साथी कहना”
पुष्पा ने सकुचाते हुए पूछा..”आप क्या करते हैं ?….क्रांतिकारी ने कहा….”हम क्रांति करते हैं…..जल,जंगल,जमीन की लड़ाई लड़ते हैं….शोषितों वंचितों की आवाज उठातें हैं…क्या तुम मेरे साथ क्रांति करोगी.” ?

पुष्पा ने सर झुकाया और धीरे से कहा.”नहीं मैं यहाँ पढ़ने आई हूँ.कितने अरमानों से मेरे किसान पिता ने मुझे यहाँ भेजा है.पढ़ लिखकर कुछ बन जाऊं तो समाज सेवा मेरा भी सपना है.”

क्रांतिकारी ने सिगरेट जलाई और बेतरतीब दाढ़ी को खुजाते हुए कहा.”यही बात मार्क्स सोचे होते.लेनिन और मावो सोचे होते….कामरेड चे ग्वेरा….?  बोलो”? तुमने पाश की वो कविता पढ़ी है.

“सबसे खतरनाक होता है मुर्दा शान्ति से भर जाना”

तुम ज़िंदा हो पुष्पा….मुर्दा मत बनों…..क्रांति को तुम्हारी जरूरत है…..लो ये सिगरेट पियो…”पुष्पा ने कह…”सिगरेट से क्रांति कैसे होगी.’….?…..क्रांतिकारी ने कहा……”याद करो मावो और चे को वो सिगरेट पीते थे……और जब लड़का पी सकता है तो लड़की क्यों नहीं….हम इसी की तो लड़ाई लड़ रहे है…यही तो साम्यवाद है….”और सुनों कल हमारे प्रखर नेता कामरेड फलाना आ रहे हैं.हम उनका भाषण सुनेंगे..और अपने आदिवासी साथियों के विद्रोह को मजबूत करेंगे…लाल सलाम.चे.मावो..लेनिन.”
पुष्पा ने कहा…”लेकिन ये तो सरासर अन्याय है.कामरेड फलाना के लड़के तो अमेरिका में पढ़ते हैं.’…वो एसी कमरे में बिसलेरी पीते हुए जल जंगल जमीन पर लेक्चर देते हैं.और वो चाहतें हैं की कुछ लोग अपना सब कुछ छोड़कर नक्सली बन जाएँ और बन्दूक के बल पर दिल्ली पर अपना अधिकार कर लें.ये क्या पागलपन है.उनके अपने लड़के क्यों नहीं लड़ते ये लड़ाई.हमें क्यों लड़ा रहे.? क्या यही क्रांति है.”?

क्रांतिकारी को गुस्सा आया.उसने कहा..”तुम पागल हो.जाहिल लड़की…तुम्हें ये बिलकुल समझ नहीं…तुमने न अभी दास कैपिटल पढ़ा है न कम्युनिस्ट मैनूफेस्टो.न तुम अभी साम्यवाद को ठीक से जानती हो न पूंजीवाद को”….पुष्पा ने प्रतिवाद करते हुए कहा….”लेकिन इतना जरूर जानती हूँ कामरेड कि मार्क्सवाद शुद्ध विचार नही है.इसमें मैन्यूफैक्चरिंग फॉल्ट है.यह हीगल के द्वन्दवाद,इंग्लैण्ड के पूँजीवाद.और फ्रांस के समाजवाद का मिला जुला रायता है.जो न ही भारतीय हित में है न भारतीय जन मानस से मैच करता है.”

क्रांतिकारी ने तीसरी सिगरेट जलाई.और हंसते हुए कहा.”हाहाहा ..ये बुर्जुर्वा हिप्पोक्रेसी..तुम कुछ नहीं जानती..छोड़ो…तुम्हें अभी और पढ़ने की जरूरत है.छोटी हो अभी तुम.कल आवो हम फैज़ को गाएंगे.” बोल के लब आजाद हैं तेरे’
पाश को गुनगुनाएंगे….हम क्रांति करेंगे.

आई विल फाइट कामरेड हम लड़ेंगे साथी..उदास मौसम के खिलाफ”

अगले दिन उदास मौसम के खिलाफ खूब लड़ाई हुई.पोस्टर बैनर नारे लगे..साथ ही जनगीत डफली बजाकर गाया गया और क्रांति साइलेंट मोड में चली गयी.तब तक दारु की बोतलें खुल चूकीं थीं.क्रांतिकारी ने कहा…”पुष्पा ये तुम्हारा नाम बड़ा कम्युनल लगता है..पुष्पा पांडे.नाम से मनुवाद की बू आती है.कुछ प्रोग्रेसिव नाम होना चाहिए.आई थिंक कामरेड पूसी सटीक रहेगा।

पुष्पा अपना कामरेडी नामकरण संस्कार सुनकर हंस ही रही थी तब तक क्रान्तिकारी ने दारु की गिलास को आगे कर दिया. पुष्पा ने दूर हटते हुए कहा….”नहीं…ये नहीं..हो सकता।”…….क्रान्तिकारी ने कहा..”तुम पागल हो..क्रान्ति का रास्ता दारु से होकर जाता है..याद करो मावो लेनिन और चे को…सबने लेने के बाद ही क्रांति किया है..” पुष्पा ने कहा..लेकिन दारु तो ये अमेरिकन लग रही…हम अभी कुछ देर पहले अमेरिका को जी भरके गरिया रहे थे..क्रांतिकारी ने गिलास मुंह के पास सटाकर काजू का नमकीन उठाया और कहा…”अरे वो सब छोड़ो पागल..समय नहीं ..क्रान्ति करो. दुनिया को तेरी जरूरत है….याद करो चे को मावो को…..हाय मार्क्स.

पुष्पा का सारा विरोध मार्क्स लेनिन और साम्यवाद के मोटे मोटे सूत्रों के बोझ तले दब गया…..वो कुछ ही समय बाद नशे में थी.क्रांतिकारी ने क्रांति के अगले सोपान पर जाकर कहा...“कामरेड पुसी ..अपनी ब्रा खोल दो..” पुष्पा ने कहा..”इससे क्या होगा?… क्रांतिकारी ने उसका हाथ दबाते हुए कहा.. “अरे तुम महसूस करो की तुम आजाद हो..ये गुलामी का प्रतीक है..ये पितृसत्ता के खिलाफ तुम्हारे विरोध का तरीका है..तुम नहीं जानती सैकड़ों सालों से पुरुषों ने स्त्रियों का शोषण किया है.. हम जल्द ही एक प्रोटेस्ट करने वाले हैं….”फिलिंग फ्रिडम थ्रो ब्रा” जिसमें लड़कियां कैम्पस में बिना ब्रा पहने घूमेंगी।”

पुष्पा अकबका गई…”ये सब क्या बकवास है कामरेड..ब्रा न पहनने से आजादी का क्या रिश्ता. “?

क्रांतिकारी ने कहा….’यही तो स्त्री सशक्तिकरण है कामरेड पुसी…देह की आजादी…जब पुरुष कई स्त्रियों को भोग सकता है…तो स्त्री क्यों नहीं….क्या तुम उन सभी शोषित स्त्रियों का बदल लेना चाहोगी?” पुष्पा ने पूछा….”हाँ लेकिन कैसे”? क्रान्तिकारी ने कहा…”देखो जैसे पुरुष किसी स्त्री को भोगकर छोड़ देता है…वैसे तुम भी किसी पुरुष को भोगकर छोड़ दो….” पुष्पा को नशा चढ़ गया था… “कैसे बदला लूँ..कामरेड ? क्रांतिकारी की बांछें खिल गयीं…..उसने झट से कहा.”अरे मैं हूँ न….पुरुष का प्रतीक मुझे मान लो….मुझे भोगो कामरेड और हजारों सालों से शोषण का शिकार हो रही स्त्री का बदला लो… बदला लो कामरेड उस दैत्य पुरुष की छाती पर चढ़कर बदला लो.”

कहतें हैं फिर रात भर लाल सलाम और क्रान्ति के साथ बिस्तर पर स्त्री सशक्तिकरण का दौर चला..बार-बार क्रांति स्खलित होती रही.कामरेड ने दास कैपिटल को किनारे रखकर कामसूत्र का गहन अध्ययन किया.अध्ययन के बाद सुबह पुष्पा उठी तो.आँखों में आंशू थे.क्या करने आई थी ये क्या करने लगी.गरीब माँ बाप का चेहरा याद आया.हाय.कुछ दिन से कितनी चिड़चिड़ी होती जा रही.चेहरा इतना मुरझाया सा.अस्तित्व की हर चीज से नफरत होती जा रही.नकारात्मक बातें ही हर पल दिमाग में आती है.हर पल एक द्वन्द सा बना रहता है.”अरे क्या पुरुषों की तरह काम करने से स्त्री सशक्तिकरण होगा की स्त्री को हर जगह शिक्षा और रोजगार के उचित अवसर देकर.पुष्पा का द्वन्द जारी था.उसने देखा क्रांतिकारी दूर खड़ा होकर गाँजा फूंक रहा है.पुष्पा ने कहा.”सुनों मुझे मन्दिर जाने का मन कर रहा है..अजीब सी बेचैनी हो रही है..लग रहा पागल हो जाउंगी..”
क्रांतिकारी ने गाँजा फूंकते हुए कहा..”पागल हो गयी हो..क्या तुम नहीं जानती की धर्म अफीम है”? जल्दी से तैयार हो जा..हमारे कामरेड साथी आज हमारा इन्तजार कर रहे…हम आज संघियों के सामने ही “किस आफ लव करेंगे”…शाम को याकूब,इशरत और अफजल के समर्थन में एक कैंडील मार्च निकालेंगे…पुष्पा ने कहा…”इससे क्या होगा ये सब तो आतंकी हैं. देशद्रोही….सैकड़ों बेगुनाहों को हत्या की है…कितनों का सिंदूर उजाड़ा है…कितनों का अनाथ किया है..क्रांतिकारी ने कहा…”तुम पागल हो लड़की.

पुष्पा जोर से रोइ….”नहीं मुझे नहीं जाना..मुझे आज शाम दुर्गा जी के मन्दिर जाना है..मुझे नहीं करनी क्रांति..मैं पढ़ने आई हूँ यहाँ..मेरे माँ बाप क्या क्या सपने देखें हैं मेरे लिए.नहीं ये सब हमसे न होगा.”क्रांतिकारी ने पुष्पा के चेहरे को हाथ में लेकर कहा…..”तुमको हमसे प्रेम नहीं.?…गर है तो ये सब बकवास सोचना छोड़ो. “याद करो मार्क्स और चे के चेहरे को.सोचो जरा क्या वो परेशानियों के आगे घुटने टेक दिए.नहीं.उन्होंने क्रान्ति किया………………….आई विल फाइट कामरेड.

पुष्पा रोइ…लेकिन हम किससे फाइट कर रहे हैं.?

क्रांतिकारी ने आवाज तेज की और कहा “ये सोचने का समय नहीं…..हम आज शाम को ही महिषासुर की पूजा करेंगे…और रात को बीफ पार्टी करके मनुवाद की ऐसी की तैसी कर देंगे.. फिर बाद दारु के साथ चरस गाँजा की भी व्यवस्था है”।

पुष्पा को गुस्सा आया..चेहरा तमतमाकर बोली.”अरे जब दुर्गा जी को मिथकीय कपोल कल्पना मानते हो तो महिषासुर की पूजा क्यों….”? क्रान्तिकारी ने कहा.”अब ये समझाने का बिलकुल वक्त नहीं…तुम चलो…मुझसे थोड़ा भी प्रेम है तो चलों..हाय चे हाय मावो…हाय क्रांति…”

इस तरह से क्रांति की विधिवत शुरुवात हुई.धीरे-धीरे कुछ दिन लगातार दिन में क्रांति और रात में बिस्तर पर क्रांति होती रही…पुष्पा अब सर्टिफाइड क्रांतिकारी हो गयी थी.ढ़ाई लिखाई छोड़कर सब कुछ करने लगी थी.कमरे की दीवाल पर दुर्गा जी हनुमान जी की जगह चे और मावो थे.अगरबत्ती की जगह.सिगरेट.और गर्भ निरोधक के साथ सर दर्द और नींद की गोलियां..अब पुष्पा के सर पे क्रांति का नशा हमेशा सवार रहता.

कुछ दिन बीते.एक साँझ की बात है पुष्पा ने अपने क्रांतिकारी से कहा…”सुनो क्रांतिकारी..तुम अपने बच्चे के पापा बनने वाले हो…आवो हम अब शादी कर लें “?….कहते हैं तब क्रांतिकारी की हवा निकल गयी…मैंनफोर्स और मूड्स के विज्ञापनों से विश्वास उठ गया..उसने जोर से कहा… “नहीं पुष्पा..कैसे शादी होगी..मेरे घर वाले इसे स्वीकार नहीं करेंगे..हमारी जाति और रहन-सहन सब अलग है….यार सेक्स अलग बात है और शादी-वादी वही बुर्जुवा हिप्पोक्रेसी….मुझे ये सब पसन्द नहीं..हम इसी के खिलाफ तो लड़ रहे हैं. ?” पुष्पा तेज-तेज रोने लगी.वो नफरत और प्रतिशोध से भर गयी.लेकिन अब वो वहां खड़ी थी जहाँ से पीछे लौटना आसान न था।

कहतें हैं क्रांति के पैदा होने से पहले क्रांतिकारी पुष्पा को छोड़कर भाग खड़ा हुआ और क्रान्ति गर्भपात का शिकार हो गयी। लेकिन इधर पता चला है की क्रांतिकारी अपनी जाति में विवाह करके एक ऊँचे विश्वविद्यालय में पढ़ा रहा। और कामरेड पुष्पा अवसाद के हिमालय पर खड़े होकर सार्वजनिक गर्भपात के दर्द से उबरने के बाद जोर से नारा लगा रही.

“भारत की बर्बादी तक जंग चलेगी जंग चलेगी
काश्मीर की आजादी तक जंग चलेगी जंग चलेगी।”-----