मुल्ला भी मैं हूँ- पंडत भी मैं-
अछूत भी मैं हूँ- चमार भी मैं,
मैं ही अनघड- मैं ही ज्ञानी-
मैं ही खलियर- मैं ही स्वामी,
चिनार भी मैं हूँ- आबनूस भी मैं-
बंजर भी मैं हूँ - समंदर भी मैं,
मैं ही आदम- मैं ही हव्वा-
मैं ही सर्जन- मैं ही हंता,
त्रेता भी मैं हूँ- द्वापर भी मैं-
सत भी मैं हूँ - कलि भी मैं,
मैं ही गीता- मैं ही कुरान-
मैं ही अवेस्ता- मैं ही अंजान,
मार्कस भी मैं हूँ- गांधी भी मैं-
नत्थू भी मैं हूँ- आइन्स्टाइन भी मैं,
मैं ही मजूर- मैं ही माली-
मैं ही कुत्ता- मैं ही खाली,
अजान भी मैं हूँ - शैतान भी मैं-
कृष्ण भी मैं हूँ- तूफान भी मैं,
मैं ही पुरूख- मैं ही वैश्या-
मैं ही किन्नर- मैं ही देवता,
मैं ही मैं हूँ-
आदि से अनंत तक-
इस सृष्टि के कण क्षण तक,
घरती से पाताल तक-
इस अम्बर से उस कल्पित ब्रह्माण्ड तक,
‘मैं’ की खोज में ही ‘मैं’ हूँ!
एक बस-
मैं ही मैं हूँ।
Source : #PMS # JaiUttrakhand