Sunday, 22 December 2019

जिसे खुद "खाक" कर रहे हो, वो तुम्हारा "शहर" कैसे?

जिसे खुद "खाक" कर रहे हो, 
वो तुम्हारा "शहर" कैसे?

 यहीं के हो ,
 तो इतना "डर" कैसे,
मगर चोरी से घुसे हो,
 तो ये तुम्हारा "घर" कैसे??

अगर तुम "अमनपसंद" हो, 
तो इतनी "गदर" कैसे?
जिसे खुद "खाक" कर रहे हो, 
वो तुम्हारा "शहर" कैसे??

कल तक सिर्फ कोहरा था, 
मेरे शहर की फ़िज़ा में,
आज़ नफरत का धुआं है, 
तो सुहानी "सहर" कैसे?

इज़हार ए नाराज़ी करो,
आईन की ज़द में,
मगर गली कूंचों में,
 इतनी "मज़हबी लहर" कैसे?

सिर्फ लहज़ा सख्त होता,
 तो हम चुप भी रह लेते,
मगर तुम्हारे लफ़्ज़ों और नारों में,
 "जिहादी ज़हर" कैसे?

सियासत से ख़िलाफ़त करो, 
हमे कोई गिला नही है,
रियासत से दग़ा होगी,
तो हम करें "सबर" कैसे?

अगर यहीँ के हो ,
तो इतना "डर" कैसे?
मगर चोरी से घुसे हो, 
तो ये तुम्हारा "घर" कैसे??

Tuesday, 5 November 2019

ख़ुदा से मांगी खुद्दारी


मैने देखा है जिंदगी को कुछ इतने करीब से,
चेहरे तमाम लगने लगे है  अजीब से...

हम तो समझे थे कि हम भूल गए है उनको,
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया।।

बात करने को निकले थे खुदा की खुदा से,
लोग जितने मिले खुदा भी उतने मिले।।

ये मालूम है कि चेहरे पे मुस्कान से चित्र सुंदर होगा,
चलो जिंदगी में मुस्कुराते तो चरित्र सुंदर होगा।।

मांगने गया था दर पे खुदा के कुछ,
देख कर जमाने को वहां अपनी खुद्दारी बचाकर सब दे आया।।

Monday, 28 October 2019

अंधेरा


इस रोशनी इस चकाचौंध ने कुछ कम किया है ज़िन्दगी का अंधेरा,
पर अंधेरे में जो सुकून था वो छीन गया।।

बुज़दिली होगी चिरागों से आंखे मिलाना,
ये धुआं छट्ठ जाए तो सूरज का दीदार करेंगे।।

बहुत सुकून से रहते थे हम अँधेरे में,
फ़साद पैदा हुआ रौशनी के आने से!

जब तक खामोशी थी तब उससे परेशान थे,
अब शोर हुआ तो ऐसा हुआ की  डर लगने लगा।

Saturday, 26 October 2019

दीवाली

सीखना है तो जुगनू की तरह जलके अंधेरे से कैसे लड़ना है वो सिख,
इस दिखावटी रोशनी में वो बात नहीं।।

बहोत ना गुज़ार हो गया है मिज़ाज़ मौसम का आज कल,
लोगो को जलाने की आदत जो हो गयी है।।

लाखो दिये जलाकर भी भूल जाते है लोग उन्हें,
जिन्होंने महीनों से अपने हाथ छाले किये है दिए बनाने में।।

एक अजीब से बेचैनी है मौसम में,
शायद वो भी कह रहा है कि  बस.. अब दम घुटता है।।

Monday, 15 July 2019

कश्ती

अब उदास फिरता है मोहल्ले में बारिश का पानी,
कश्तियाँ बनाने वाले बच्चे मोबाइल से मोहब्बत कर बैठे।।