Monday, 28 October 2019

अंधेरा


इस रोशनी इस चकाचौंध ने कुछ कम किया है ज़िन्दगी का अंधेरा,
पर अंधेरे में जो सुकून था वो छीन गया।।

बुज़दिली होगी चिरागों से आंखे मिलाना,
ये धुआं छट्ठ जाए तो सूरज का दीदार करेंगे।।

बहुत सुकून से रहते थे हम अँधेरे में,
फ़साद पैदा हुआ रौशनी के आने से!

जब तक खामोशी थी तब उससे परेशान थे,
अब शोर हुआ तो ऐसा हुआ की  डर लगने लगा।

Saturday, 26 October 2019

दीवाली

सीखना है तो जुगनू की तरह जलके अंधेरे से कैसे लड़ना है वो सिख,
इस दिखावटी रोशनी में वो बात नहीं।।

बहोत ना गुज़ार हो गया है मिज़ाज़ मौसम का आज कल,
लोगो को जलाने की आदत जो हो गयी है।।

लाखो दिये जलाकर भी भूल जाते है लोग उन्हें,
जिन्होंने महीनों से अपने हाथ छाले किये है दिए बनाने में।।

एक अजीब से बेचैनी है मौसम में,
शायद वो भी कह रहा है कि  बस.. अब दम घुटता है।।