Friday, 29 May 2020

Drama or Debates

#Shame_RepublicTV.
If this we call a NewsChannel then we better stop watching news anymore.

My humble request to all the Digital Media regulators to not allow these #Cartoons_on_National_Channels.

They will present u vague facts, unknown documents, half baked stories, irrelevant data and then they will shout loud and ask us all to judge them.

I am sure you watch these #Debates_or_Drama,   for half an hour and your blood pressure will shoot up and every part of your body will be bleeding due to anger, irritation, annoyance or something else.

Unfortunately, this is what the news channels wants, to enhance and  encash their TRPs.

It is easier to influence and convince people through emotions rather than factual evidence.

 Save #Indian_Journalism, which is  going through a phase that I wish I hadn’t witnessed in my lifetime.

I request you all 
#Dont_get_trapped.

Sunday, 17 May 2020

ये देश इनका भी उतना है जितना तेरा और मेरा है।।


ये देश इनका भी उतना है
जितना तेरा है और मेरा है,
फिर अपने ही घर जाने की आस में
क्यूँ ये घबराया सा गरीब मजदूर श्रमिकों का रेला है?

शर्म आती है अपने ऊपर
'विकसित' समाज और सरकारों पर,
ये तेरा राज्य ये मेरा राज्य के नाम पर
क्यूँ पशुओं की तरह हमने इन्हें इधर उधर ठेला है?

क्यूँ आखिर क्यूँ?

ये देख इनका भी उतना है जितना तेरा और मेरा है।।

Saturday, 16 May 2020

ख़ाक जिंदा है हम



 मज़लूम की मौत-
मौत न रहकर-
बस नंबर भर रह जाए,

जब दूर कोई नेता- 
अपनी आरामगाह से-
निर्लज्ज आँकड़ों में उलझाकर-
अपनी जीत बघाये।

जब ज़िम्मेदार-
बदहाली पर-
मासूमियत दिखाए,

जब भूख से-बेकारी से-
घर जाने की लाचारी से,

सडक पर-
कोई बेवजह जान गवाए,

तब यकीन मानों-
मरा वो नहीं- मरे हैं हम।

मरे हैं हम,
बिन आत्मा के जिंदा है हम।।

Thursday, 14 May 2020

प्रकृति ने पृथ्वी को मौका दिया है।

सुधरने का सुधारने का,
आदतों को बदलने का,
थोड़ा सोचने, थोड़ा समझने का,
आत्मचिंतन का मौका दिया है,
प्रकृति ने पृथ्वी को एक मौका दिया है।

टूटे रिश्तों को जोड़ने का,
पश्चिमी आचरण को छोड़ने का,
स्वदेश को, स्वदेशी को अपनाने का,
स्वयं को, देश को आत्मनिर्भर बनाने का मौका दिया है,
प्रकृति ने पृथ्वी को एक मौका दिया है।

दूर भागती जिंदगी को ठहरने का,
कुछ फुरसत के पल बिताने का,
कॉफी से चाय पर आने का,
हाथ जोड़, नमस्ते दोहराने का,
प्रकृति ने फिर इंसा को एक मौका दिया है।

तुलसी का मूल्य समझने का,
वेदों को, योग को अपनाने का,
स्वर्णिम भारतीय इतिहास को  पुनर्जीवित करने का,
फिर से खुद को पहचानकर, घर को लौटने का मौका दिया है,
प्रकृति ने संभलने का एक मौका दिया है। 

इंसानों को घरों में कैद कर,
जंगल में जानवरों को रिहा किया है,
नदियों को, नहरों को फिर से जीने का,
परमाणु के युग में कीटाणु कि अहमियत समझने का अवसर दिया है

प्रकृति ने पृथ्वी को एक मौका दिया है।।

शुभम गुप्ता
सहायक कमांडेंट
31 वाहिनी,
(केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल)