इस रोशनी इस चकाचौंध ने कुछ कम किया है ज़िन्दगी का अंधेरा,
पर अंधेरे में जो सुकून था वो छीन गया।।
बुज़दिली होगी चिरागों से आंखे मिलाना,
ये धुआं छट्ठ जाए तो सूरज का दीदार करेंगे।।
बहुत सुकून से रहते थे हम अँधेरे में,
फ़साद पैदा हुआ रौशनी के आने से!
जब तक खामोशी थी तब उससे परेशान थे,
अब शोर हुआ तो ऐसा हुआ की डर लगने लगा।
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