Tuesday, 5 November 2019

ख़ुदा से मांगी खुद्दारी


मैने देखा है जिंदगी को कुछ इतने करीब से,
चेहरे तमाम लगने लगे है  अजीब से...

हम तो समझे थे कि हम भूल गए है उनको,
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया।।

बात करने को निकले थे खुदा की खुदा से,
लोग जितने मिले खुदा भी उतने मिले।।

ये मालूम है कि चेहरे पे मुस्कान से चित्र सुंदर होगा,
चलो जिंदगी में मुस्कुराते तो चरित्र सुंदर होगा।।

मांगने गया था दर पे खुदा के कुछ,
देख कर जमाने को वहां अपनी खुद्दारी बचाकर सब दे आया।।

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