Tuesday, 25 October 2022

मैं

मुल्ला भी मैं हूँ- पंडत भी मैं-
अछूत भी मैं हूँ- चमार भी मैं,

मैं ही अनघड- मैं ही ज्ञानी-
मैं ही खलियर- मैं ही स्वामी,

चिनार भी मैं हूँ- आबनूस भी मैं-
बंजर भी मैं हूँ - समंदर भी मैं,

मैं ही आदम- मैं ही हव्वा-
मैं ही सर्जन- मैं ही हंता,

त्रेता भी मैं हूँ- द्वापर भी मैं-
सत भी मैं हूँ - कलि भी मैं,

मैं ही गीता- मैं ही कुरान-
मैं ही अवेस्ता- मैं ही अंजान,

मार्कस भी मैं हूँ- गांधी भी मैं-
नत्थू भी मैं हूँ- आइन्स्टाइन भी मैं,

मैं ही मजूर- मैं ही माली-
मैं ही कुत्ता- मैं ही खाली,

अजान भी मैं हूँ - शैतान भी मैं-
कृष्ण भी मैं हूँ- तूफान भी मैं,

मैं ही पुरूख- मैं ही वैश्या-
मैं ही किन्नर- मैं ही देवता,

मैं ही मैं हूँ-

आदि से अनंत तक-
इस सृष्टि के कण क्षण तक,

घरती से पाताल तक-
इस अम्बर से उस कल्पित ब्रह्माण्ड तक,

‘मैं’ की खोज में ही ‘मैं’ हूँ!

एक बस- 
मैं ही मैं हूँ।

Source : #PMS # JaiUttrakhand

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