चलो-
फिर से अंजान हो जाते हैं।
इस भागती हुई जिंदगी में कहीं खो जाते हैं,
और अचानक फिर कहीं मिल जाते हैं,
क्या पता-
उस आवाज का, उन नशीली आंखो का जादू फिर चल जाए,
क्या पता-
वो मोहब्बत, वो पागलपन फिर जग जाए,
वो खामोश रातें, फिर बोलने लगें,
पहली नजर का- वो पहला इश्क,
शायद-
फिर से हो जाए,
चलो!
चलो न-
फिर से अंजान हो जाते हैं।
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