जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना
अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाए ।।
नई ज्योति के धर नए पंख झिलमिल,
उड़े मर्त्य मिट्टी गगन स्वर्ग छू ले,
लगे रोशनी की झड़ी झूम ऐसी,
निशा की गली में तिमिर राह भूले,
खुले मुक्ति का वह किरण द्वार जगमग,
ऊषा जा न पाए, निशा आ ना पाए
जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना
अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।
जगमग नव प्रकाश हो पावन
दीप जला दो, आँगन-आँगन
ये प्रकाश के पंख रुपहले
दूर क्षितिज पर जाकर पहले
कर दें अपना यह विज्ञापन
दीप जला दो, आँगन-आँगन
धुंधले पंथ, अँधेरी राहें
पकड़-पकड़ ज्योतिर्मय बाहें
स्वर्ग बना दें, जगत अपावन
दीप जला दो आँगन-आँगन
अँधकार का नष्ट गर्व है
दीप जले हैं, ज्योतिपर्व है
उजला-उजला दामन-दामन
दीप जला दो आँगन-आँगन
मन से मन का दीप जलाएँ
आजीवन जन-जीवन गाएँ
द्वेषभाव का किए विसर्जन
दीप जला दो, आँगन-आँगण।।
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